Tuesday, September 3, 2019

उत्तरवाहिनी गंगा के कारण प्रसिद्ध है बिहार का सुल्तानगंज


गंगा तट
दिन शनिवार, अंग्रेजी दिनांक 10 अगस्त 2019। सुबह के दस बज रहे हैं और मैं खड़ा हूं बिहार राज्य के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट पर। ठीक सामने गंगा जी की अथाह व गंभीर जलराशि तो पीछे है गंगाजल लेने आये श्रद्धालुओं की अपार भीड़। बगल ही अजगबी नाथ मंदिर से अनवरत आ रही धंटियों की आवाज, गंगा की जलधारा में चलती नाव, जी भरकर डुबकी लगाने में जूटे भक्तों का समूह। ये कुछ ऐसे नजारे थे जिन्हें देखना वाकई अदभुत था। इसी बीच ‘बोल बम‘ का जयकार लगाता कांवरियों का एक जत्था गंगा जल भरकर देवघर की ओर निकल पड़ता है। इनलोगों की मंजिल यहां से 105 किलोमीटर दूर झारखंड राज्य स्थित देवघर है और यह दूरी उन्हें पैदल ही नापनी है। बता दूं कि देवघर, बाबाधाम के नाम से भी जाना जाता है जो 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है। यू तो सुल्तानगंज में सालोंभर लोग गंगा स्नान करने को पहुंचते हैं पर सावन में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है।
      रात भर की बस यात्रा के बाद सुबह पांच बजे सुल्तानगंज पहुंच चुका था। बस से उतरते ही मैं भी एक भक्तिमय माहौल का हिस्सा बन गया। हर तरफ से एक ही आवाज आ रही थी, ‘बोल बम‘। सभी अपने अपने कांवर में गंगाजल भरकर देवघर यानी बाबाधाम की ओर जा रहे थे। श्रद्वालुओं की कतार देखकर ही समझ गया कि गंगा तट जाने के लिए मुझे किस ओर जाना है। सुबह के पांच बज रहे थे बावजूद सभी दुकानें खुली थी। कोई दातौन ले रहा था, कोई गंगाजल भरने के लिए पात्र तो कुछ अन्य सामग्री। दुकानदारों ने ही बताया कि सावन महीने में यहां की अधिकांश दुकानें रात दिन खुली रहती है। सबसे पहले मैं एक होटल गया जहां एक अच्छा कमरा मिल गया। यहां कई होटल हैं जहां आप रूक सकते हैं।

     सुबह के ठीक दस बजे मैं होटल से बाहर निकलकर गंगा नदी के किनारे पहुंच गया। तट पर पैर रखने तक की जगह नहीं है। तट पर कई चौकियां लगी हुई है जिस पर बैठकर यहां के पंडितगण जल संकल्प करवा रहे हैं। भक्तों का जत्था तट पर आकर देर तक डुबकी लगाते हुए जल भरकर अपने गंतव्य की ओर निकल जा रहा है। कुछ लोग इस उद्वेश्य के साथ जल भर रहे हैं कि सोमवार तक देवघर पहुंच जायेंगे। यहां ध्यान देने वाली बात है कि सावन में सोमवार का बहुत ही महत्व है इसलिए लोगों की चाहत होती है कि वे सोमवार को जलार्पण करें। सावन मास के दौरान हर सोमवार को दो से ढाई लाख लोग जलार्पण करते हैं ऐसे में सावन सोमवारी की महत्ता को बखूबी समझा जा सकता है। एक कांवरियां सुल्तानगंज पहुंचकर अपने कांवर में गंगाजल भरता है तथा 105 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर देवघर पहुंचता है व बाबा बैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग में गंगा जल अर्पित करता हैं। कांवरियां सुल्तानगंज से निकलकर यथाशक्ति पैदल चलते हैं थक जाने पर रूकते हैं या रात्रि विश्राम करते हैं उसके बाद फिर यात्रा पर निकल पड़ते हैं। ऐसे में कुछ दो दिनों में पहुंचते हैं, कुछ तीन दिन में तो कुछ चार दिनों में। वहीं कांवरियों का एक ऐसा भी वर्ग है जो बिना रूके 24 घंटे के अंदर देवघर पहुंचकर जलार्पण करता है। इस तरह के कांवरियों को डाक कांवरिया कहा जाता है। गंगा तट पर आते ही मैं भी अपने आपको रोक नहीं सका और डुबकी लगाने गंगा में प्रवेश कर गया।
अजगबीनाथ मंदिर

      अब मैं गंगा तट से निकलकर मुख्य मार्ग की ओर आते हुए बाबा अजगबीनाथ मंदिर पहुंचता हूं। यहां भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। होटल से निकले हुए अब दो घंटे बीत चुके हैं। अब वापस होटल की ओर जा रहा हूं। सुल्तानगंज मुख्य बाजार में कई होटल हैं। यहां के सभी होटलों में शुद्व शाकाहारी भोजन मिलता है यहां लहसुन, प्याज तक का उपयोग नहीं किया जाता है। चूंकि मैं जिस होटल में ठहरा हूं वहां भोजन की व्यवस्था नहीं है इसलिए मै बाहर ही खाना खा ले रहा हूं। 
    अभी शाम के चार बज रहे हैं और मैं दुबारा गंगा तट पहुंच चुका हूं। अब भी पहले जैसे ही भीड़ है। पर इस समय डाक कांवरियों की संख्या ज्यादा है। डाक कांवरियां अधिकांशतः शाम को ही जल उठाते हैं तथा पूरी रात पैदल यात्रा करते हुए सुबह आठ से दसे बजे तक देवघर पहुंच जाते हैं। इसी क्रम में कुछ स्थानीय निवासियों से भी बात होती है। स्थानिय निवासियों के अनुसार गंगा स्नान करने लोग सुल्तानगंज पहुंचते हैं। सालोंभर लोगों का आवागमन जारी रहता है पर सावन महीना में तो प्रतिदिन हजारों की संख्या में यहां स्नान करने पहुंचते हैं। यही नहीं अंतिम संस्कार के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं ऐसी मान्यता है कि यहां दाह संस्कार करवाने से मृतात्मा का मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।
     बताते चलें कि यह जगह बिहार राज्य के भागलपुर जिला में स्थित है। यहां उत्तरवाहिनी गंगा होने के कारण गंगा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जब भागीरथ के प्रयास से गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ तो उनके वेग को रोकने के लिए भगवान षिव अपनी जटाओं को खोलकर गंगा के मार्ग में उपस्थित हो गए। षिवजी के प्रभाव से गंगा गायब हो गयीं पर देवताओं के प्रार्थना पर भगवान ने उन्हें अपनी जांघ के नीचे बहने का मार्ग दिया। चूंकि भगवान महादेव स्वयं इस धरती पर प्रकट हुये अतः भक्तों ने स्वायम्भुव शिव का मंदिर स्थापित किया जो अजगवीनाथ मंदिर के नाम से विश्वविख्यात है। यहां सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन भी है लिहाजा सड़क मार्ग के अलावा रेल से भी आया जा सकता है।

लगभग आठ बज रहे हैं, अगगबीनाथ मंदिर  से जयकारे व धंटियों की ध्वनी आ रही है शायद आरती की आवाज हो। पूरा क्षेत्र लाइट से जगमगा रहा है अभी भी तट पर श्रद्वालुओं की चहलकदमी देखी जा रही है। और अब मैं भी होटल की ओर जा रहा हूं। और इस तरह मेरी सुल्तानगंज की एक दिवसीय यात्रा समाप्त हो गयी।

No comments:

Post a Comment