Wednesday, April 17, 2019

जानें कितना खास है राजधानी से रेल यात्रा का अनुभव

 

राजधानी] भारतीय रेलवे का एक ऐसा नाम जो परिचय का मोहताज नहीं है। एक महत्वपूर्ण ट्रेन] उन ट्रेनों में से एक जिसमें यात्रियों की सुविधा] स्वच्छता] समय पाबंदी आदि पर विशेष ख्याल रखा जाता है। भले ही इसकी टिकट कुछ महंगी हो पर आपकी यात्रा काफी आरामदायक व ससमय होती है। इस पोस्ट में मैं 12301 कोलकाता दिल्ली राजधानी एक्सेप्रेस की यात्रा का अनुभव साझा कर रहा हूं। साथ में यह भी बताने की कोशिश करूंगा की आपको इस ट्रेन की यात्रा क्यों करनी चाहिए।

   मैनें अपनी यात्रा की शुरूआत हावड़ा जंक्शन से की। हावड़ा से यह दिल्ली के लिए शाम 16ः50 बजे खुलती है। हलांकि मैं समय से लगभग एक घंटे पूर्व ही जंक्शन पहुंच गया था। कुछ देर यूं ही स्टेशन परिसर में टहलते हुए विभिन्न गाड़ियों की समय सारणी व स्टेशन में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेता रहा। संकेत मिलते ही प्लेटफार्म पे खड़ा हो गया कुछ ही देर में राजधानी प्लेटफार्म पर खड़ी थी।


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 अपनी टिकट के अनुसार मैं राजधानी के एच 1 कोच में सवार हो गया। हलांकि में समय समय पर राजधानी की सवारी करता हूं पर यह पोस्ट लिखने के उद्धेश्य से आइआरसीटीसी के एप्पलीकेशन से टिकट बूक किया और और एच 1 कोच यानी कि फस्र्ट क्लास के डब्बे में सवार हो गया। देखा जाय तो फस्र्ट क्लास की टिकट महंगी है, इतने में आप फलाइट से महज दो - ढाई घंटे में दिल्ली पहुंच जायेंगे। अगर आप फस्र्ट क्लास की यात्रा कर रहे हैं तो चार हजार आठ सौ अस्सी रूप्ये तथा सेकेंड व थर्ड में क्रमशः तीन हजार तीन सौ नब्बे रूप्ये व दो हजार छः सौ बीस रूप्से खर्च करने पड़ेंगे। इस ट्रेन को अपने गंतव्य तक पहुंचने में तकरीबन 17 घंटे 10 मिनट का समय लगता है। यह शाम 4ः50 बजे हावड़ा जंक्शन से खुलती है जो सुबह 10 में नई दिल्ली स्टेशन पहुंचती है। 1453 किलोमीटर की दूरी की यात्रा के दौरान 9 स्टेशनों पर इसका पड़ाव है।
कोच के अंदर प्रवेश करते ही आपको इस बात का अनुभव हो जाता है कि आप राजधानी से सफर करने वाले है। केबिन व गलियारा हर कुछ साफ सुथरा मिलता है। स्वच्छता के साथ-साथ सुरक्षा का भी खास ख्याल रखा जाता है। गाड़ी खुलने से पहले हरेक बर्थ व यात्रियों की सामान की जांच कर ली जाती है। यह गाड़ी रविवार को छोड़कर प्रतिदिन चलती है। वहीं 12302 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी नई दिल्ली स्टेशन से कोलकाता के लिए शाम 16ः55 में खुलती है तथा लगभग 17 घंटे बाद दिन में 09ः55 बजे हावड़ा जंक्शन पहुंचती है।
ठीक 16ः50 बजे यह ट्रेन अपने गंतव्य की ओर सरकने लगी और कुछ ही समय में इसने अपनी रफ्तार पकड़ ली। एक ओर गाड़ी ने अपनी गति पकड़ ली वहीं दूसरी ओर यात्रियों के बीच स्नेक्स, पानी की बोतल आदि वितरित की जाने लगी। 201 किलोमीटर की यात्रा तय करने के  बाद गाड़ी अपने प्रथम हाल्ट यानी आसनसोल स्टेषन पहुंची। यह रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल राज्य का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेषन है। यहां से छूटते ही अपनी रफ्तार पकड़ ली और ठीक एक घंटे बाद हमलोग धनबाद जंक्शन पहुंच चुके थे। यह स्टेशन झारखंड राज्य के धनबाद जिला में स्थित है जो काला हीरा यानी कोयला के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। अब कोच के अंदर डिनर परोसे जाने की कवायद षुरू हो गए थी। महज 20 - 25 मिनट के बाद ही घोषणा हुई कि अब हमलोग पारसनाथ स्टेशन पहुंचने वाले है। पारसनाथ पहुंचने का समय 20ः35 तथा यहां से खुलने का समय 08ः37 है। यह स्टेशन झारखंड के गिरिडीह जिला में स्थित है। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में जैन धर्मावलंबी यहां आते है। कारण? समीप ही पारसनाथ पर्वत है जो 20 तीर्थंकरों का निर्वाण स्थल है। लिहाजा यह विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इन्हीं यात्रियों के सुविधार्थ राजधानी का ठहराव इस स्टेशन में शुरू में किया गया। अब तक हमलोग 307 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुके थे। हमलोगों के बीच रात्रि भोजन परोसा जा चुका था।

        ठीक दो घंटे बाद यह ट्रेन गया जंक्शन पर खड़ी थी। यह बिहार के गया जिला मुख्यालय में स्थित है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन के मुगलसराय डिवीजन में आनेवाला यह दिल्ली - हावड़ा मार्ग का एक मुख्य स्टेशन है। यहां से जहानाबाद, पटना, किउल आदि जगहों के लिए दैनिक एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें मिलती है। यहां भी पर्यटकों व तीर्थयात्रियों का आवागमन होता रहता है, ऐसा इसलिए क्योंकि बोध गया बौद्ध धर्मावलंबियों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। मेरे केबिन में दो ही लोग थे जो अब तक सो चुके थे यही हाल लगभग पूरी ट्रेन का था। रात 00ः45 बजे यानी दूसरे दिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पहुंचे जिसका कोड डीडीयू है। मालूम हो यह जंक्शन पहले मुगलसराय जंक्षन के नाम से जाना जाता था। यह उत्तर प्रदेश का एक मुख्य रेलवे स्टेशन है। अगस्त 2018 में योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा इस स्टेशन का नाम मुगलसराय जंक्शन से बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रख दिया गया। बताते चलें पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक जनसंघ नेता थे। अब तक 662 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी थी। लगभग दो घंटे बाद हम इलाहाबाद स्टेशन पहुंच चुके थे। इलाहाबाद जंक्शन उत्तर प्रदेश राज्य का एक मुख्य स्टेशन है। यह हावड़ा - दिल्ली मेन लाइन तथा इलाहाबाद - हावड़ा - मुबंई मेन लाइन का मुख्य स्टेशन है। तड़के 04ः50 बजे यह ट्रेन कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंचती है। यह भी उत्तर प्रदेश का एक मुख्य स्टेशन है जो कानपुर में स्थित है। यह देश के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक है। लगभग 611 ट्रेनें यहां से होकर प्रतिदिन गुजरती है। 04ः55 में फिर से अपने गंतव्य की ओर सरकने लगी। अब तक 1005 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी थी।
        धीरे - धीरे खिड़की से बाहर का नजारा धूंधला से दिखाई देने लगा। कुछ समय बाद सूर्य की किरणें फैल गयी और बाहर का नजारा स्पष्ट दिखाई देने लगा। और एक बार फिर लगभग 12 घंटे बाद पीछे छूटते खेत, पैड़ - पौधे, गांव व अन्य स्टेशनों का नजारा काफी लुभावना था। इसी बीच एक बार और ब्रेकफास्ट के लिए स्नेक्स, चाय आदि परोसा गया। बाहर का नजारा देखते देखते कई धंटे बीत गए और आखिरकार वह समय आ गया जब घोशणा हुई कि कुछ ही क्षणों में हम अपना गंतव्य नई दिल्ली स्टेशन पहुंचने वाले हैं। और हुआ भी यही, तय समय पर गाड़ी नई दिल्ली स्टेशन के प्लेटफार्म पर खड़ी थी। मेरी यात्रा काफी आनंददायक व आरामदायक रही।  
                      

क्यों करें इस ट्रेन से सफर


अगर आप निंश्चत होकर आरामदायक यात्रा का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो बेशक इस ट्रेन से सफर करें। सीट पर बैठे यात्रियों व रेल कर्मचारियों के अलावा कोई अवांछित व्यक्ति या भीड़ से आपका सामना नहीं होगा। आप बेफिक्र होकर सफर कर सकते हैं चाहे जिस कोच में हो। प्रीमियम ट्रेन होने के नाते नाश्ता व भोजन की कीमत आपके टिकट में जुड़ होता है इसलिए खाद्य सामग्री के लिए आपको कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं है। साफ सुथरा शौचालय व पूरे ट्रेन में स्वच्छता का ख्याल इस ट्रेन को और विशेष बनाता है।

                                                         - दीपक मिश्रा

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