Monday, February 25, 2019

दुःखहरणनाथ धाम : मनोकामना को ले यहां पहुंचते हैं शिवभक्त

मुख्य द्वार 
दुःखहरणनाथ धाम, एक ऐसा धाम जहां लोग इस उम्मीद के साथ पहुंचते हैं कि यहां मत्था टेकते ही उनका दुःख समाप्त हो जायेगा। झारखंड के गिरिडीह जिला मुख्यालय से लगभग लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर उसरी नदी तट पर स्थित इस मंदिर में दूर-दूर से भक्तगण पूजोपासना करने पहुंचते हैं। खास कर सोमवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है। कोलाहल से दूर इस शांत वातावरण में असीम शांति की अनुभूति होती है। मैं 16 फरवरी को बाइक से दुःखहरणनाथ धाम गया।
    सुबह नौ बजे के लगभग मैं गिरिडीह जिला मुख्यालय पहुंच चुका था। शहर से इस धाम की दूरी लगभग आठ किलोमीटर की है। जैसे आप गिरिडीह से धनबाद की ओर बढ़ते हैं लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर बायीं तरफ एक अलग मार्ग मिलेगा। इस स्थल पर एक प्रवेश द्वार बना हुआ है। इस मार्ग में प्रवेश करते ही कई फैक्ट्रियां मिली। फैक्ट्रियों का क्षेत्र समाप्त होते ही मंदिर का दर्शन होने लगा। शांत क्षेत्र में यह मंदिर स्थित है। यह आस्था व विश्वास ही है कि लोग दूर दराज क्षेत्रों से इस स्थल पर अपनी मनोकामना लेकर आते है।
   नौ बजकर बीस मिनट पर मैं पहुंच चुका था। यहां का माहौल पूरी तरह शांत था। मंदिर के ठीक सामने ही एक नदी बहती है। इस उसरी नदी  तक पहुंचने के लिए पक्की सीढ़ी बनायी गयी है। मैं भी नदी पहुंचा वहां पूजा के लिए जल लिया व मंदिर परिसर में प्रवेष किया। यहां एक ओर भगवान षिव का मंदिर है तो ठीक उसके सामने माता पार्वती का मंदिर है। इसके अलावा मंदिर परिसर में कई अन्य देवी देवताओं का भी मंदिर है। हलंाकि मंदिर से जुड़ी कोई पुरानी जानकारी नहीं मिली पर बताया जाता है कि यह मंदिर काफी प्राचीन है। षिवभक्त पूरी आस्था व भक्तिभाव से अपनी मनोकामना को ले यहां पूजा अर्चना करने पहुचते हैं। प्रत्येक सोमवार के अलावा सावन पूर्णिमा व महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।


मंदिर परिसर 

शिवलिंग

नदी जाने का मार्ग


मंदिर के समीप की नदी