Tuesday, January 22, 2019

पौष पूर्णिमा : समाधिस्थल पर उमड़ा भक्तों का सैलाब

समाधिस्थल
तय कार्यक्रम के तहत सर्द सुबह लंगटा बाबा की समाधिस्थल के लिए तैयार हुआ। सुबह 6 बजे बाइक स्टार्ट किया और चल दिया अपने गंतव्य की ओर, लेकिन दस किलोमीटर चलने के बाद ही इस बात का अहसास हो गया कि इस कंपकांपाती मौसम में बाइक चलाना भी इतना आसान काम नहीं है। जैसे ही बाइक अपनी गति पकड़ती ठंढी हवा शरीर में चूभने लगती। तीस किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद कुछ देर भगवान भास्कर की प्रतिक्षा में खड़ा रहा ताकि धूप निकलने के बाद कुछ राहत मिले लेकिन ऐसा होना नहीं था सो नहीं हुआ। वहां से बिना कहीं रूके एक सौ किलोमीटर की दूरी नाप ली।
 नौ बजे मैं जमुआ चैक पहुंच चुका था। जमुआ चैक से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर समाधिस्थल से है। यही से चादरपोशी को ले चहलपहल देखी जा रही थी। न केवल झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों से बल्कि अन्य राज्यों से भी बाबा भक्तों का जत्था समाधि की ओर पूरे श्रद्धा भाव से जा रहा था। जमुआ से निकलते ही भारी भीड़ मिलने लगी, धीरे - धीरे आगे बढ़ते हुए मैं खरगडीहा पहुंच गया। खरगडीहा स्थित मुख्य मार्ग में जबर्दस्त भीड़ थी। भक्तों की सुविधा के लिए समाधि स्थल से एक किलोमीटर पहले से ही जमुआ - देवघर मुख्य पथ पर दोनों और बैरियर लगाकर वाहनों का आवगमन रोक दिया गया था। नयी जगह पर पहुंचकर भीड़ का आकलन करना एक कठिन काम है। वैसे यहां कोई ऐसा कार्यालय आदि भी नहीं मिला जिससे भीड़ के बारे में ठीक ठाक अंदाजा मिल जाय लिहाजा मैं भीड़ से संबंधित कोई आंकड़ा  नहीं दे रहा हूं।
समाधिस्थल के अंदर का नजारा भी बाहर जैसा ही था, जहां भक्तों की भीड़ अपने - अपने हाथों में चादर लेकर चादरपोशी करने को ले अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। भीड़ ऐसी कि सरकना पड़ रहा था। पहुंचते ही बताया गया कि चादरपोशी का सिलसिला सुबह तीन बजे से ही शुरू हो गया था। समााधि में सबसे पहले चादरपोशी स्थानीय थाना के थाना प्रभारी ने की। उसके बाद  भक्तजनों के लिए दरवाजा खोल दिया गया। भारी भीड़ होने के कारण भीड़ को अनियंत्रित होते भी देखा गया। लेकिन प्रशासन की सतर्कता और इंतजाम की वजह से शीघ्र नियंत्रित कर लिया जाता रहा। महिला और पुरूष के लिए अलग अलग प्रवेश द्वार और निकासी की व्यवस्था की गयी थी।
                                                 लंगटा बाबा समाधि दिवस के अवसर पर विभिन्न जगहों से साधु और फकीर भी पहुंचे। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इनलोगों के लिए यहां धूनी रमाने और खान पान की माकूल व्यवस्था की गयी थी। बाबा को माननेवाले हजारों संतों का भी यहां मेला लगा रहा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों द्वारा निःशुल्क चाय, बिस्कुट आदि की व्यवस्था की गयी थी।
 


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