Friday, December 21, 2018

15 जनवरी 2019 से शुरू होगा प्रयाग अर्धकुम्भ


           तदर्धे वर्षमाने च कुम्भोर्धं सार्धपंचकम्।

           अर्धकुम्भं विजानीयात् फलार्धं मोक्षदायकम्।।

कुम्भ पर्व का आयोजन प्राचीन काल से ही होता रहा है और सनातन धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन एवं नासिक इन चार क्षेत्रों में क्रम से प्रत्येक बारह वर्षों के अंतराल पर पूर्ण कुम्भ पर्व का आयोजन होता है। लेकिन हरिद्वार तथा प्रयाग में हर छठवें वर्ष अर्धकुम्भ का भी आयोजन होता है। इस बार यानि जनवरी 2019 में अर्धकुम्भ मेला का आयोजन प्रयाग में किया जाएगा जिसकी तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार भी मेला को ले पूरी तरह से तैयार है। बताया जाता है कि मेला का आयोजन 15 जनवरी 2019 से शुरू होगा जो 31 मार्च तक चलेगा। प्रयाग में कुंभ पर्व के तीन प्रमुख स्नान होते हैं जिन्हें शाही स्नान भी कहा जाता है। ऐसे में मकर संक्राति, दिनांक 15.01.2019 को प्रथम स्नान, माघ अमावस्या (सोमवती अमावस्या), 04.02.2019 को द्वितीय स्नान एवं माध शुक्ल पंचमी (वसंत पंचमी), 10.02.2019 को तृतिय स्नान होगा। इसके अलावा भी तीन और विषेश स्नान हैं जो पौष पूर्णिमा - 21.01.2019, माघी पूर्णिमा - 19.02.2019 एवं महाशिवरात्रि - 04.03.2019 को होगा। इस मेला में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि स्नान से समस्त पापों का नाश होता है तथा जन्म - मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।

कुंभ का अर्थ

आस्था एवं विश्वास पर टीकी कुंभ की परंपरा सदियों से निर्वाध गति से चल रही है। कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता है। बताया जाता है कि देवासुर संग्राम के बाद जब देव व दानव पक्ष समुद्र मंथन को राजी हुए तो मंथन के क्रम में चैदह रत्नों की प्राप्ती हुई और उसे बांट भी लिया गया। लेकिन अमृत कलश के निकलते ही दोनों पक्षों में अमृत बंटवारे को ले युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गयी। तब भगवान बिष्णु ने स्वयं मोहिनी रूप धारण कर सभी को अमृत पान कराने की बात कही और अमृत कलश का दायित्व इंद्र पुत्र जयंत को सौंपा। उक्त कलश की रक्षा के लिए जब जयंत भाग रहे थे तभी अमृत की कुछ बूंदे पृथ्वी की चार जगहों पर यानि हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन एवं नासिक में गिरी। ज्योतिषिय दृश्टिकोण से बृहस्पति के मेष राशि चक्र में प्रविष्ट होने तथा सूर्य और चंद्र के मकर राशि में आने पर अमावस्या के दिन प्रयागराज में त्रिवेणी संगम तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है।

कई मामलों में विशेष होगा इस बार का कुंभ

       इधर कुंभ मेला को यादगार बनाने के लिए यूपी सरकार ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। जहां विभिन्न स्थलों को सजाया संवारा गया है वहीं सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम होंगे। इधर मुख्मंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा कि है कि पहली बार ऐसी व्यवस्था की गयी है जिससे कुंभ में जल, थल एवं नभ मार्ग से श्रद्धालु पहुंचेंगे। यही नहीं पहली बार अक्षयवट और सरस्वती कूप का भी दर्शन कर पाऐंगे। प्रकाश की सारी व्यवस्था एलइडी द्वारा की जाएगी। टैण्ट सिटि, पेण्ट माई सिटि, अक्षयवट दर्शन, संस्कृति ग्राम आदि नई पहल की गयी है। लेजर शो और डिजिटल साइनेज की भी व्यवस्थाएं हैं। कुंभ क्षेत्र का विस्तार 3200 हैक्टेयर तक में किया गया है। 

कैसे पहुंचे

रेल - प्रयागराज की गिनती भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में होती है। यह रेलवे से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
वायुयान - प्रयागराज एयरपोर्ट बमरौली शहर से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सड़क - वहीं सड़क मार्ग की बात करें तो राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग से पूरी तरह जुड़ा हुआ है।


-इस ब्लाग में नियमित रूप से आते रहें। अर्धकुम्भ से जुड़ी हर गतिविधियों की जानकारी आप तक पहुंचाउंगा साथ ही साथ कुंभ मेला के दौरान यात्रा वृतांत भी साझा करूंगा।

Saturday, December 15, 2018

पिकनिक स्थलों में शुरू हुआ सैलानियों का आगमन

खंडोली में बनी मूर्ति को देखता एक बच्चा
दिसंबर का दूसरा पखवारा शुरू होते ही विभिन्न पिकनिक स्थलों में सैलानियों की चहलकदमी तेज हो गयी है। झारखंड राज्य स्थित गिरिडीह के खंडौली डैम व उसरी फाल में पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगी है। दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से लेकर जनवरी के प्रथम सप्ताह के बीच इन स्थलों में भारी भीड़ होती है। एक जनवरी को भी इस ब्लाग में इन जगहों की तस्वीर साझा करूंगा।
   बता दूं कि गिरिडीह जिला मुख्यालय से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर खंडोली डैम स्थित है।  इस डैम में लोग नौका विहार का आनंद उठाने यहां पहुंचते है। साथ ही साथ यहां का प्राकृतिक नजारा भी लोगों का अपनी और आकर्षित करता है। यहां बनाया गया उद्यान भी देखने लायक है। मोर, खरगोश जैसे छोटे -छोटे जानवर, झूला आदि बच्चों को ज्यादा आकर्षित करते हैं। वहीं प्रवासी पक्षियों का कलरव भी मन को सुकून पहुंचाता है। कई लाोग काफी देर तक किनारे बैठकर पक्षियों को जल में अठखेलियां करते देखते हैं। वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर उसरी फाल है। इस झरना को देखने भी भारी संख्या में लोग पहुंचते है। खासकर नववर्ष का स्वागत करने के क्रम में यहां आना नहीं भूलते। पानी की कल कल करती ध्वनि के बीच कुछ लोग केवल प्रकृति की सुंदरता का लाभ उठाते हैं तो कुछ वनभोज का भी आनंद लेते है। फिलहाल इन दो जगहों में सैलानियों का आगमन शुरू हो गया है।


Friday, December 14, 2018

ऐसे करें यात्रा की तैयारी

लगभग 15 दिनों पहले मुझे जम्मू जाना था। ट्रेन लेट होने के कारण लगभग 6 घंटे की यात्रा के बाद हावड़ा स्टेशन से बाहर निकलते ही मैनें अपने मोबाइल से केब बूक करना चाहा तो मेरे मोबाइल की बैट्री मात्र 20 प्रतिशत चार्ज थी। बैग व पाॅकेट चेक करने के बाद पता चला कि चार्जर लेना ही भूल गया। डब्ल्यूबीटीसी की बस से एयरपोर्ट पहुंच गया। मेरे पास प्रिंट टिकट नहीं था और अगर मेरा मोबाइल बंद हो जाता तो एयरपोर्ट प्रवेश करने के लिए टिकट भी नहीं दिखा पाता। ऐसे में सुबह चार बजे की फ्लाइट थी और मैं रात दस बजे ही एयरापोर्ट के अंदर चला गया। अंदर जाकर जब अपना मोबाइल चार्ज किया और समय काटने के लिए जब इयरफोन निकाना चाहा तभी देखता हूं कि अपना इयरफोन भी घर में ही छोड़ आया हूं। ऐसा नहीं है कि आप बाहर ये सब चीजें नहीं खरीद सकते हैं, पर मेरे कहने का मतलब है कि छोटी छौटी चीजे भी हमें बड़ी परेशानी से बचाती है। इन चीजों की कमी से आप झल्लाहट महसूस करने लगेंगे। बहुत पहले से ही कहीं जाने की योजना बन रही हो तो यात्रा की तैयारी में कमी रह जाने की संभावना बहुत कम होती है। फिर भी नयी जगह जाने का अतिउत्साह व कौतुहल से कभी- कभी बहुत सी महत्वपूर्ण चीजें छूट जाती है, उस समय अफसोस करने के अलावा कोई विकलप नहीं बच जाता है। यात्रा की तैयारी अच्छी हो तभी यात्रा का सही आनंद भी मिलता है। इस पोस्ट में कुछ बिंदुओं का जिक्र किया है जिसे यात्रा पर जाने से पहले एकबार जरूर चेक कर लें।

यात्रा सामग्रियों की सूची बनायें - कहीं भी जाना हो पहले यात्रा पर जाने से पहले वहां ले जाने वाले सामानों की सूची जरूर बना लें। कपड़े, साबून, तेल, कंघा, मोबाइल हेडफोन चार्जर, घड़ी, दवा, डेबिट के्रडिट कार्ड, कैमरा आदि ऐसी चीजें हैं जो हर यात्रा में आवष्यक है। हो सके तो पहले ही सूची बना लें और घर से निकलते समय मिलान कर लें। भले ही आप ट्रेन, फ्लाइट, होटल आदि का आनलाइन टिकट बनाये हो पर उसकी हार्डकापी अपने पास जरूर रख लें। जब भी मैं इस तरह की सूची बना कर कहीं जाता हॅू कभी किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

स्थल की पूरी जानकारी ले लें - आप चाहे तीर्थस्थल की यात्रा पर जा रहे हैं या फिर पर्यटन स्थल की। जाने से पहले उस स्थल की जहां तक संभव हो बुनियादी जानकारी ले लें। स्थल पहुंचकर भी सोचसमझकर ही किसी से जानकारी या सहायता मांगे। बेहतर होगा किसी सरकारी या ट्रस्ट के काउंटर या पूछताछ कार्यालय से जानकारी लेना।

अकेले न जाएं - नयी जगह पर कभी भी अकेले न जाएं। समूह में यात्रा करने से किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निबटा जा सकता है।

तीर्थयात्रा के नियमों का पालन -  अगर आप कोई प्रसिद्व तीर्थ स्थल यानि तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं तो वहां के नियमों को भली भांति समझे तथा उसका पालन करें। तीर्थस्थलों में खास कर शुद्धता पर घ्यान दिया जाता है। खान पान तथा वहां की परंपरा व नियमों के पालन करें। ताकि किसी पूजा व विधान में शामिल होने से वंचति न रह सकें।

Friday, December 7, 2018

रॅाक गार्डेन : भारत का एक अनोखा उद्यान

रॅाक गार्डेन के अंदर का नजारा
आमतौर पर गार्डेन यानि उद्यान का नाम आते ही जेहन में एक ऐसा स्थल आता है जहां चारो और रंगबिरंगे फूल हो। किस्म के किस्म के फूलों पर मंडराते भंवरे, चहचहाती चिडियां तथा सुगंधित वातावरण, ऐसा नजार एक गार्डेन में दिखना आम है। पर आज मैं जिस गार्डेन में आपको लेकर जा रहा हूं वहां फूल नहीं बल्कि पत्थर मिलेंगे। लेकिन इन बेकार पत्थरों को भी इस तरह का रूप दिया गया है जो फूल से कम आकर्षक नहीं लगते। जी हां, मैं बात कर रहा हूं पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ स्थित राक गार्डेन की। चालीस एकड़ में फैले इस गार्डेन को नेक चंद सैनी गार्डेन के नाम से भी जाना जाता है। इस गार्डेन का निर्माण उन्होंने ही किया था।
                                       
फ्लाइट से दिखता शहर का दृश्य
                                 

        चंडीगढ़ एयरपोर्ट में लैंडिंग का समय सुबह सात बजे का था।फ्लाइट से ही शहर का  नजारा देखते ही आपको इस बात का आभास होने लगता है कि आप उस षहर की यात्रा करने वाले है जो काफी व्यवस्थित है। षहर की पूरी संरचना पूर्व नियोजित है तथा अलग अलग सेक्टर में बंटा है। एयरपोर्ट से बाहर निकने के बाद सेक्टर 21 स्थित एक होटल में पहुंचा जहां मुझे यह बताया गया कि यू ंतो चंडीगढ़ में देखने के लिए कई जगह है पर मुझे राक गार्डन अवष्य ही देखना चाहिए। लगभग ग्यारह बजे मैं राक गार्डेन पहुंचा। टिकट काउंटर पर भीड़ नहीं थी।

झरना का दृश्य



 गार्डेन में प्रवेष करते ही पुराने पत्थरों की कई आकृतियां मिली। कुछ कदम आगे बढता गया और ऐसे ही पत्थरों की आकृतियां मिलती गयी। कम भीड़,प्रवेश स्थल पर सन्नाट, साधारण से लग रही पुराने पत्थरों की आकृतियां देख मन में पश्चाताप का भाव आने लगा। आखिर क्यों आ गया यहां, केवल समय बर्बाद करने। फिर सोचा जब अंदर आ ही गया हूं तो पूरा घूम लेता हूं।
एक और झरना का दृश्य

आगे एक गली मिली, गली से आगे बढ़ते ही पानी गिरने की आवाज सुनाई दी। जैसे जैसे आगे बढ़ता गया पत्थरों व अन्य बेकार की वस्तुओं से बनी कलाकृतियां साधारण से असाधारण होती गयी।
       आगे बढ़ते ही वाकई मुझे एक उद्यान का वातावरण मिलने लगा। चारो तरफ पेड़- पौधे, पहाड़ी की आकृति लिए पत्थरों का ढेर। अब मेरे में मन में भी इस स्थल को लेकर विचार बदलने लग गए थे। बाद में पर्यटकों का समूह भी दिखने लगा। कुछ यहां की कलाकृतियां व प्राकृतिक नजारों को निहार रहे थे तो कुछ सेल्फी लेने में मशगूल थे। कई जगइ सीढी़नुमा ऐसे जगह बनाए गए थे जहां से इस उद्यान की सुंदरता को देखा जा सकता है। आगे बढ़ते ही एक कृत्रिम झरना मिला जहां काफी उंचाई से दीवारों के सहारे पानी नीचे गिरता है। यहंा आकर कोई भी अपना फोटो लेना नहीं भूलता यही वजह था कि फोटो लेने वालों की यहां काफी भीड़ थी।

                                         
अंदर बनी मूर्तियां

   आगे बढ़ते - बढ़ते एक खुली जगह पर पर पहुंच गया मानो बड़ा मैदान हो। यहां बैठने की भी जगह थी। वहीं बगल में अलग - अलग कक्ष थे जहां तरह - तरह की चीजें थी। कुछ ऐसे दर्पण थे जिसमें आपका चेहरा विकृत दिखाई देता है। किसी दर्पण में एक व्यक्ति मोटा दिखाई देता है तो किसी एक में बौना। वहीं सामने क्रम से झूले लगे थे जिसमें कई लोग झूला का भी आनंद ले रहे थे। यहीं पर एक ऐसा कक्ष भी था जहां कपड़ा आदि से मूर्तियां बनायी गयी है जो ग्रामीण परिवेष को दर्षा रहा है। वहीं इस राक गार्डेन से जुड़ी जानकारियां भी है। यह पार्क सुखना झील के निकट स्थित है।
                                     

यहां की प्राकृतिक वातारण तो आपको आकर्शित करता ही है पर कूड़ा - कर्कट, जैसे प्लास्टि की बोतले, पुरानी चूडियां, टूटे कप -प्लेट, टाइल्स आदि  चीजों से इतनी खूबसूरती से आकृतियां बनायी गयी है कि आपकी नजरे हटती नहीं है। ये सब देखने के बाद लगता है कि अगर आप कभी चंडीगढ़ आते हैं तो इसे देखना न भूलें।

कैसे पहुंचे -
चंडीगढ़ में अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट है साथ ही साथ यहां रेलवे स्टेशन भी है जो देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।