Friday, November 16, 2018

भुवनेश्वर - पुरी : छोटी यात्रा का यादगार अनुभव

 म तौर पर ट्रेन सफर का अनुभव उस समय काफी यादगार होता है जब आप कोई प्रसिद्ध  स्थल जा रहे हैं। रेल यात्रा में कई सहूलियत भी मिलती है यही वजह है कि बस, टैक्सी आदि की सुविधा उपलब्ध रहने के बावजूद मैनें भुवनेश्वर से पुरी जाने के लिए ट्रेन का ही चयन किया। नयी जगह होने के कारण पहले से ही नंदन कानन
एक्सप्रेस में रिजर्वेसन करा लिया था। हलांकि एक दिन पूर्व ही रेलवे के एक एप्पलीकेशन से यह जानकारी मिली गयी थी कि जिस गाड़ी में रिजर्वेसन था वह छह घंटे लेट है। बाद में उसी एप्पलीकेशन से इंटरसिटि एक्सप्रेस में सीट बुकिंग कियंा।
          तय समय यानि सुबह के दस बजे हमलोग भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे। आम तौर जैसे स्टेशनों का माहौल रहता है ठीक वैस ही माहौल था। आने जाने वाली गाड़ियों की घोषणा हो रही थी। भागमभाग वाला माहौल आपको इस बात की याद दिलाते रहता है कि आप यात्रा पर हैं।ज्यादा भीड़, घक्कामुक्की या कोई अन्य परेशानी हो तो एडजस्ट करें और यात्रा का आनंद लें। नयी जगह पर नये लोग मिलते हैं तो बहुत कुछ जानने समझने को मिलता है। जिस गाड़ी में हमारा रिजवर्सेन था वह छह घंटे लेट थी, पर दूसरी गाड़ी भी लेट थी। लगभग दो घंटे की प्रतीक्षा के बाद प्लेटफार्म पर इंटरसिटि एक्सप्रेस आयी। गाड़ी लगभग खाली थी, मैं जिस बोगी पर सवार हुआ उसमें दो- चार लोग ही हुए बैठे थे। पांच मिनट बाद गाड़ी अपने गंतव्य की ओर सरकने लगी।

यात्रा का आनंद लेते बच्चे


 ट्रेन की खिड़की से शहर का वह हिस्सा भी देख पाया जो देख नहीं सका था। खाली गाड़ी में आराम से बैठकर बाहर का नजारा देखना आनंददायक होता है। लगभग एक घंटे बाद  गाड़ी खुर्धा रोड पहुंची। कुछ लोग जो थे वे भी उतर गए। फिर से गाड़ी आगे की ओर सरकने लगी, रफतार से खेतों से गुजरते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ती जा रही थी।
         लगभग आधे घंटे बाद पुरी स्टेशन में प्रवेश कर गयी। समुद्र देखने का काफी उत्साह था, शायद खिड़की से दिख जाय। भले ही न दिखे पर हमलोग अपनी मंजिल पर आ चुके थे  और अब चंद मिनटों मे समुद्र दर्शन करने वले थे। गाड़ी से उतरते ही कई आटो वालो ने पूछना शुरू कर दिया। मेरी राय है कि पहले आप स्टेशन से बाहर निकल जायें, सामने ही आटो स्टैंड है। एक- दो आटो वाले से किराया पूछ कर वाजिब किराया तय कर लें।



 भुवनेश्वर से पुरी की यात्रा का समय बहुत ही कम (लगभग डेढ़ घंटा) था पर यात्रा का अनुभव उत्कृष्ट था। आगे मैं पुरी व जगन्नाथ धाम से संबंधित दो अलग- अलग पोस्ट साझा करूंगा। 

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