Sunday, November 11, 2018

बहुसांस्कृतिक शहर है भुवनेश्वर

म्ंदिरों का नगर भुवनेश्वर, एक ऐसी जगह जहां आप न केवल प्राचीन मंदिरों से रूबरू होते हैं बल्कि उस शहर से आपका पचिय होता है जो लंबे अरसे से सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजे हुए हैं। यहां एक से बढ़कर एक स्थापत्य नमूने हैं। आप भले ही शहर घूमते हुए शारिरिक रूप से थक जाएं पर मन यहां का हर कोना झांकना चाहेगा। और हो भी क्यों न, प्राचीन शिल्प कला, मंदिरों की भव्यता व शुचिता, खान-पान, सबकुछ अनूठा व रोचक है। यह एक बहुसांस्कृतिक शहर है। एक से बढ़कर एक मंदिर जिसे देखते ही इसे हमेशा अपनी आंखें में सहेज लेने की तीव्र इच्छा होती है, शायद इसलिए इसे मंदिरों के नगर की संज्ञा दी गयी है। मैंने भी इस शहर के बारे में बहुत कुछ पढ़ा व सुना था यही वजह है कि मेरी जिज्ञासा भी चरम पर थी।
         रांची स्थित स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डा से सुबह भुवनेश्वर के लिए हमारी फलाइट थी। भुवनेश्वर घुमने की इच्छा संजोए हमलोग तय समय पर एयरपोर्ट पहुचंे तथा चेकइन की सारी औपचारिकताएं पूरी की। फलाइट भी समय पर थी लिहाजा सुबह 10ः05 में हम बिजु पटनायक अतराश्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड कर गए।
भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर पत्नी व बच्चे


बाहर निकलते ही यहां का वातावरण स्पष्ट रूप से संकेत देने लगा कि हम मंदिरों के नगर में आ चुके हैं। हमलोगों की तरह वैसे भी कई यात्री थे जो इस शहर की सुंदरता व विषेशताओं को निहारने पहुंचे थे। मैनें इस ब्लाग पर भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर तथा नंदन कानन चिड़ियाघर का विवरण दिया है। ‘नंदन कानन: जहां प्रकृति व पशु, पक्षियों से होता है साक्षात्कार‘, ‘लिंगराज मंदिर: कलिंग शैली का सर्वश्रेश्ठ स्थापत्य‘ शीर्षक से पोस्ट पढ़ सकते हैं।
   


होटल का कमरा
   महज 22-24 घंटे बीताकर आप एक शहर की नब्ज बहुत अच्छी तरह से तो टटोल नहीं सकते। उसमें से कुछ घंटे तो केवल एयरपोर्ट, स्टेशन व होटल के बीच चक्कर काटने में बीत जाते हैं। यहां मेरे पास समय की कमी थी पर जिस होटल में मैं ठहरा था ठीक उसी के प्रवेश द्वार पर एक आटो वाला मिला। उसने कहा कि वह यहां के सभी मंदिरों व अन्य दर्शनीय स्थल मसलन म्यूजीयम आदि का क्रम से दर्शन करा देगा। फिर क्या था तुरंत ही योजना बनी और शुरू हो गयी हमारी मंदिर दर्शन यात्रा।
          सबसे पहले हमलोग लिंगराज मंदिर पहुंचे । लिंगराज मंदिर परिसर के अंदर एक मंदिरों का समूह है। इसके अलावा इसके आसपास कई प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर एक संग्रहालय भी है जो दर्शनीय है। पर याद रखें यह सोमवार को बंद रहता है।
म्यूजीयम

बात भुवनेश्वर की करें और यहां के खान पान का जिक्र न हो तो यह इस शहर के लिए अन्याय होगा। यहां का भोजन काफी स्वादिष्ट होता है नारियल तेल से पके व्यंजन का स्वाद जल्द भूला नहीं पाऐंगे। और अगर आप ननवेज पसंद करते हैं तो मछली का स्वाद भी आपको आकर्षित करेगा। तटीय क्षेत्र होने के कारण यहां ताजी मछलियां मिलती है जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं। यही नहीं आलू दम दही बड़ा, इडली, डोसा, पू़डी सब्जी आदि भी काफी स्वादिश्ट थे। वाकई में स्वाद की समझ भी इस स्मार्ट सिटि की बेहतरीन है।

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