Tuesday, October 23, 2018

बिहार - झारखंड के जैन तीर्थ स्थल



लछवाड़ मंदिर

बिहार - झारखंड में जैन धर्मावलंबियों के कई प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं। मैनें अपने ब्लाग में पारसनाथ, मधुबन आदि के बारे में भी लिखा है। मैं यहां आपको ये बताना चाहूंगा कि जैन धर्म के अनुसार तीर्थ क्षेत्र को तीन भागों में बांटा जा सकता है जो क्रमशः निर्वाण क्षेत्र (सिद्ध क्षेत्र), कल्याण क्षेत्र एवं अतिशय क्षेत्र है। जिन जगहों पर तीर्थंकरों या मुनियों ने मोक्ष प्राप्त किया हो उस क्षेत्र को निर्वाण या सिद्ध क्षेत्र कहा जाता है। वहीं जिन क्षेत्रों में तीर्थंकर भगवान के गर्भ, जन्म, दीक्षा एवं केवल ज्ञान आदि में कोई एक कल्याण संपन्न हुए हो तो उस क्षेत्र को कल्याण क्षेत्र कहा जाता है। इसके अलावा जिन जगहों में मुनियों या आराधकों ने आत्म शक्ति का चमत्कार प्रकट किया हो या फिर कोई चमत्कारी प्रतिमा प्रतिष्ठित हो उन क्षेत्रों को अतिशय क्षेत्र कहा जाता है। 

            इस लेख में यही बताने जा रहा हूं कि बिहार एवं झारखंड की भूमि में तीनों प्रकार के तीर्थ है। पारसनाथ, मधुबन तथा गिरिडीह जिला क्षेत्र में पड़ने वाले जैन तीर्थ स्थलों का विवरण पूर्व के लेख में दे चूका हूं। उन जगहों की जानकारी के लिए कृप्या वे लेख पढ़ें। शुरूआत करते हैं देवधर से। देवघर जिला मुख्यालय स्थित दिगंबर जैन मंदिर में 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजमान है। यहां एक पुस्तकालय भी है जहां जैन दर्शन से संबंधित विभिन्न प्रकार की पुस्तके हैं। हलांकि यह क्षेत्र जैन तीर्थ की सूची में नहीं है। चूंकि यहां मंदिर था इसलिए मैनें इसका विवरण दे दिया।
1. मंदारगिरि -  देवघर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर मंदारगिरि है जो दिगंबर मतानुसार 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का दीक्षा एवं निर्वाणकल्याणक क्षेत्र है। यह क्षेत्र बिहार के बांका जिला में पड़ता है। इस पहाड़ी की उंचाई डेढ़ किलोमीटर है वहीं पर्वत के नीचे मंदिर, पापहारिणी तालाब एवं कुण्ड आदि दर्शनीय हैं। पर्वत के उपर एक बड़ा जैन मंदिर भी है।

2. चंपापुर - मंदारिगिरि से चंपापुर की दूरी 65 किलोमीटर दूर है। यहां स्थित जैन मंदिर भगवान वासुपूज्य को समर्पित है। चंपापुर में दिगंबर व ष्वेतांबर की तीन कोठियां है। दिगंबर जैन तेरहपंथी कोठी में भगवान वासुपूज्य का प्राचीन मंदिर, मानस स्तंभ, सुरंग, मनोहारी झांकियां आदि दर्जनाधिक चीजें दर्षनीय हैं। वहीं दिगंबर जैन बीसपंथी कोठी में भी भगवान वासुपूज्य का जिनालय है। वहीं श्वेतांबर जैन धर्मशाला के अंदर भी दो जिनालय एवं दादा बाड़ी दर्शनीय है। यह स्थल बिहार के भागलपुर जिले में स्थित है।

3. लछवाड़ - चंपापुर से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर है लछवा़ड़ जो बिहार के जमुई जिला में स्थित है। श्वेतांबर मत के अनुसार लछ़वाड़ भगवान महावीर का जन्म दीक्षा स्थल है। यहां पर भगवान महावीर का एक भव्य मंदिर व धर्मशाला निर्मित है। धर्मशाला से दक्षिण की ओर क्षत्रियकुंड नामक एक छोटी सी पहाड़ी है। कहा जाता है कि पहाड़ी का वन ज्ञातखंड वन कहलाता है जहां भगवान महावीर ने दीक्षा ली थी। हलांकि इसमें मतभेद भी सामने आता है।

4. गुणावाजी - लछवाड़ से गुणावा की दूरी लगभग 72 किलोमीटर है। यह बिहार के नवादा जिला में स्थित है तथा भगवान महावीर के प्रधान गणधर इन्द्रभूति गौतम का केवल ज्ञान क्षेत्र है। गुणावा में एक दिगंबर धर्मशाला है जिसमें एक शिखर बंद मंदिर हैं।

5. पावापुरी - गुणावा से पावापुरी की दूरी 23 किलोमीटर है। यह भगवान महावीर की निर्वाण स्थली है अतः यह सिद्ध क्षेत्र है। भगवान महावीर ने अंतिम देशना के बाद र्कार्तक कृष्ण चर्तुदषी को रात्रि के समय निर्वाण प्राप्त किया था। यहां जल मंदिर, प्राचीन एवं नवीन समवशरण, भगवान महावीर की चौमुखी प्रतिमा, प्राचीन स्तूप समेत दर्जनाधिक दर्शनीय स्थल है।

6. कुंडलपुर - सिद्ध क्षेत्र पावापुरी से कुंडलपुर की दूरी 25 किलोमीटर है। दिगंबर मत के अनुसार यह स्थल भगवान महावीर की गर्भ, जन्म व तप भूमि  है। हलांकि इस बात को ले मतभेद भी है। वहीं श्वेतांबर परंपरा के अनुसार यहां पर भगवान महावीर स्वमा के गणधर इंद्रभूति, अग्निभूति एवं वायुभूति का जन्म स्थान है। यहां दिगंबर एवं श्वेतांबर दोनों संप्रदाय की धर्मशालाएं हैं तथा इन धर्मशालाओं में मंदिर है।

7. राजगृह - कुंडलपुर से राजगृह की दूरी 17 किलोमीटर है। यहां पांच पहाड़ हैं जिसे पंचपहाड़ी भी कहा जाता है। इन्हीं में से एक पर्वत पर भगवान महावीर की दिव्य ध्वनी खिरी थी। यह स्थल बीसवें तीर्थंकर सुव्रतमुनि के गर्भ, तप व केवलज्ञान कल्याणक क्षेत्र है। यहां बहुत से दर्शनीय स्थल है।

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